ब्रहमचारिणी देवी: तप, भक्ति और अडिग संकल्प की देवी नवरात्रि की दूसरी सुबह का आलोक कुछ अलग ही होता है। पहली किरण की तरह शांति, मौसम की ठंडक, मंदिर में घी-दीप की हल्की खुशबू और भजन-कीर्तन की मीठी प्रतिध्वनि—यह वह दिन है जब माँ ब्रहमचारिणी हमारे सामने आती हैं, हाथों में जपमाला और कामण्डलु लिए हुए, वस्त्र मोती जैसे सफेद, आभा शांत और चेहरा स्थिरता से भरा। यह कहानी है दृढ़ता की, तप की, उस अडिग आराधना की जिसने माँ ब्रहमचारिणी को “तपस्विनी”, “चारिणी” और “ब्रह्म” से जोड़ दिया। कथा: तपस्विनी पार्वती की दृढ़ प्रतिज्ञा बहुत समय पहले, हिमालय के कुशल राजा हिमवान और रानी मेना की पुत्री पार्वती का जन्म हुआ। बचपन से ही पार्वती ने सुना था कि सिर्फ प्रेम-संबंध ही नहीं, बल्कि आत्म-शुद्धि और समर्पण से ही भगवान शिव जैसे महात्मा का हृदय जीतना संभव है। ऋषि नारद के उपदेशों ने पार्वती के हृदय में संकल्प जगा दिया कि वह शिव को पति के रूप में पाएँगी। तब से पार्वती ने संसार की भौतिक सुख-सुविधाएँ त्याग कर तपस्या की राह पकड़ ली। फल, फलों की पत्तियाँ, या कभी-कभी बीज-दल से जीवन व्यतीत किया। वर्षों वर्ष खुली झड़...