इस श्रावण अमावस्या, शिवालय जाएँ और दीपक जलाएँ। एक छोटा-सा उपाय आपके जीवन में बड़े परिवर्तन ला सकता है।
नीचे पढिये : बारा राशींयों के लिये दीप दान की विधी कहते है, एक समय की बात है। काशी नगरी में एक भक्त हर अमावस्या को शिव मंदिर जाता और शिवलिंग के सामने घी का दीपक जलाता। लोग उससे पूछते – “भाई, अंधेरी रात में दीपक जलाने से क्या मिलता है?” वह मुस्कुराकर कहता – “यह दीप केवल अंधकार मिटाने के लिए नहीं, बल्कि मेरे पापों के अंधकार को दूर करने के लिए है।” आज हम जिस परंपरा को निभाते हैं, उसका आधार केवल लोकश्रद्धा नहीं बल्कि शास्त्रों का आदेश है। 📖 शास्त्रीय प्रमाण शिवपुराण (विद्येश्वर संहिता, अध्याय - ): “यः प्रदीपं समारोप्य शिवस्य पुरतो भवेत्। तस्य पुण्यफलं नित्यं ब्रह्मलोकेऽपि दुर्लभम्॥” 👉 जो शिव के सामने दीप जलाता है, उसे ब्रह्मलोक तक दुर्लभ पुण्य मिलता है। पद्मपुराण (उत्तरखंड): “अमावास्यायां प्रदीपदानं सर्वपापक्षयकारकम्।” 👉 अमावस्या पर दीपदान सारे पापों को नष्ट करता है। स्कंदपुराण (काशीखंड): विशेष रूप से कहा गया है कि काशी या किसी भी शिवालय में अमावस्या को दीपदान करने से पितरों की शांति होती है और परिवार में सुख-शांति आती है। गरुड़पुर...